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Bihar Land News: सिर्फ CO की रिपोर्ट पर जमाबंदी रद्द नहीं होगी, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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Alam Ki Khabar: बिहार में जमीन विवाद पर पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि केवल सीओ की रिपोर्ट के आधार पर जमाबंदी रद्द नहीं की जा सकती। सरकार को आपत्ति होने पर सक्षम दीवानी न्यायालय में वाद दायर करना होगा।

पटना, 17 जुलाई। आलम की खबर: बिहार में जमीन विवाद से जुड़े मामलों पर पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि केवल अंचल अधिकारी (सीओ) की रिपोर्ट के आधार पर किसी भी जमीन की जमाबंदी रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार किसी जमाबंदी पर आपत्ति जताती है या उस पर अपना अधिकार स्थापित करना चाहती है तो उसे सक्षम दीवानी न्यायालय में वाद दायर करना होगा। न्यायिक प्रक्रिया अपनाए बिना प्रशासनिक आदेश से जमाबंदी समाप्त करना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता। यह फैसला जस्टिस सौरेंद्र पांडेय की एकलपीठ ने वाणी झा, विभूति कुमार और निर्मला देवी की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने वर्ष 2006 में पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से संबंधित जमीन खरीदी थी। इसके बावजूद अंचल अधिकारी ने मृत व्यक्ति के नाम से चली आ रही जमाबंदी को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की और वर्ष 2021 में उसे निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि करीब 90 वर्षों से चली आ रही जमाबंदी को राजस्व अधिकारी अपने स्तर पर रद्द नहीं कर सकते। यदि सरकार को स्वामित्व पर आपत्ति है तो उसे सक्षम दीवानी अदालत में मुकदमा दायर कर अपना पक्ष रखना चाहिए। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि अंचल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अपर समाहर्ता ने जमाबंदी रद्द करने का आदेश पारित किया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रशासनिक आदेश को निरस्त कर दिया और कहा कि राज्य सरकार चाहे तो विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत सक्षम न्यायालय में दावा प्रस्तुत कर सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन के स्वामित्व का अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा। बिहार में जमाबंदी भूमि का सबसे महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड माना जाता है। इसमें जमीन के मालिक का नाम, खाता, खेसरा, रकबा और अन्य राजस्व विवरण दर्ज रहते हैं। जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण, मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी यही दस्तावेज प्रमुख आधार होता है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य के हजारों भूमि विवादों पर असर डाल सकता है।

भूमि विवादों पर दूरगामी असर

पटना हाईकोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए राहत माना जा रहा है जिनकी जमाबंदी प्रशासनिक आदेशों के जरिए रद्द की गई है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भूमि स्वामित्व जैसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया सर्वोपरि है और किसी भी पक्ष को कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

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